🔴 स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण के बीच मरीजों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को साइबर अपराधों से बचाव की दी जानकारी।
🔴 गूगल पर दिखने वाली हर वेबसाइट भरोसेमंद नहीं, केवल आधिकारिक वेबसाइट एवं एप का ही करें उपयोग।
ग्वालियर। 29.06.2026 । मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित प्रदेशव्यापी विशेष साइबर जागरूकता अभियान ‘‘सेफ क्लिक 2.0‘‘ के छठवें दिवस की थीम ‘‘स्वास्थ्य एवं जनसेवा संस्थान‘‘ के अंतर्गत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह (भापुसे) के निर्देशन एवं अभियान के नोडल अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सुजावल जग्गा (भापुसे) के मार्गदर्शन में ग्वालियर जिले के विभिन्न शासकीय एवं निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य केन्द्रों तथा अन्य जनसेवा संस्थानों में व्यापक साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अस्पतालों में उपचार हेतु आए मरीजों, उनके परिजनों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल विद्यार्थियों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं आम नागरिकों से संवाद स्थापित कर उन्हें वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। अभियान के दौरान साइबर सुरक्षा संबंधी पोस्टर, बैनर एवं पम्पलेट के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण के साथ साइबर सुरक्षा का महत्व बतायाः- सेफ क्लिक 2.0 अभियान के तहत आज आरोग्यधाम हॉस्पिटल सिटी सेंटर में साइबर क्राइम ब्रांच के उनि0 हरेन्द्र सिंह राजपूत एवं उनकी टीम ने हॉस्पिटल के डॉक्टर व नर्सिगस्टॉफ को साइबर सुरक्षा के टिप्स दिये। उन्होने बताया कि वर्तमान समय में अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ऑनलाइन भुगतान, ई-मेल, एसएमएस एवं मोबाइल एप आधारित सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में मरीजों की व्यक्तिगत एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अत्यंत संवेदनशील होती है, इसलिए डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। छोटी-सी लापरवाही से पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी तथा व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग हो सकता है।
डॉक्टर के अपॉइंटमेंट के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट एवं एप का ही करें उपयोग- इसी प्रकार थाना कम्पू क्षेत्रातंर्गत जेएएच अस्पताल में भी आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। इस अवसर पर उन्हे विशेष रूप से बताया गया कि डॉक्टर अथवा अस्पताल का अपॉइंटमेंट लेने के लिए केवल संबंधित अस्पताल, चिकित्सा संस्थान अथवा डॉक्टर की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत मोबाइल एप का ही उपयोग करें। कई बार गूगल सर्च में सबसे ऊपर दिखाई देने वाली वेबसाइट अथवा विज्ञापन फर्जी हो सकते हैं, जिनके माध्यम से साइबर अपराधी लोगों से अग्रिम भुगतान कराकर धोखाधड़ी करते हैं या उनकी व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। किसी भी अनजान लिंक, विज्ञापन अथवा संदिग्ध वेबसाइट पर अपनी जानकारी साझा करने से बचें।
*फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल एवं ओटीपी फ्रॉड से रहें सतर्क-* ग्वालियर पुलिस ने शासकीय एवं निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य केन्द्रों तथा अन्य जनसेवा संस्थानों पुलिस अधिकारियों ने आमजनों को बताया कि साइबर अपराधी फर्जी कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश, ई-मेल अथवा लिंक भेजकर स्वयं को अस्पताल, बैंक, बीमा कंपनी अथवा सरकारी संस्था का प्रतिनिधि बताकर ओटीपी, बैंकिंग जानकारी एवं व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। नागरिकों से अपील की गई कि किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी, पासवर्ड, बैंक विवरण अथवा व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
व्हाट्सएप अकाउंट हैकिंग एवं स्पैम कॉल से बचाव के उपाय बताए- जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को व्हाट्सएप अकाउंट हैकिंग, फर्जी कस्टमर केयर, स्पैम कॉल एवं डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि व्हाट्सएप पर प्राप्त किसी भी सत्यापन कोड को किसी के साथ साझा न करें, टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू रखें तथा स्पैम या संदिग्ध कॉल एवं संदेशों को तुरंत ब्लॉक एवं रिपोर्ट करें।
मजबूत पासवर्ड एवं सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने की अपील- ‘‘सेफ क्लिक 2.0‘‘ साइबर अभियान के तहत जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में स्थित शासकीय एवं निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य केन्द्रों तथा अन्य जनसेवा संस्थानों आमजनों को मजबूत एवं अलग-अलग पासवर्ड रखने, समय-समय पर पासवर्ड बदलने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने, मोबाइल एवं कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को नियमित अपडेट रखने, एंटीवायरस का उपयोग करने तथा सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर वित्तीय लेन-देन करने से बचने की सलाह दी गई। साथ ही यह भी समझाया गया कि किसी भी संदेश, लिंक या ऑफर पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। अभियान के दौरान लोगों को साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की संपूर्ण प्रक्रिया भी समझाई गई। उन्हें बताया गया कि यदि किसी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी, यूपीआई फ्रॉड, बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग, डिजिटल अरेस्ट अथवा किसी अन्य प्रकार का साइबर अपराध होता है तो वे तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें तथा वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में बिना विलंब किए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को होल्ड अथवा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।





