ग्वालियर। 03.02.2026। पुलिस मुख्यालय म.प्र. भोपाल के आदेश के पालन में एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 से संबंधित विधिक प्रावधान एवं माननीय उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित विधि के विषय में अनुसंधानकर्ता अधिकारियों एवं पर्यवेक्षणकरता अधिकारियों को प्रशिक्षित करने हेतु इकाई स्तर पर दिनांक 02.02.2026 से 03.02.2026 तक दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज पुलिस कन्ट्रोल रूम सभागार ग्वालियर में *वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह(भापुसे)* के द्वारा समापन किया गया। प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी *अति. पुलिस अधीक्षक शहर(पश्चिम/अपराध) श्रीमती सुमन गुर्जर* की उपस्थिति में इस कार्यशाला के दूसरे दिन *वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी आरएफएसएल ग्वालियर डॉ विनोद ढिंगरा, रिटायर्ड डीएसपी श्री मुनीश राजौरिया, एवं एनडीपीएस कोर्ट से एजीपी धर्मेन्द्र कुमार शर्मा* के द्वारा ग्वालियर जिले के 80 सीधी भर्ती के उप निरीक्षकों को एनडीपीएस एक्ट की विवेचना की बारीकियों से अवगत कराया गया। इस अवसर पर कार्यशाला में सूबेदार आयुष मिश्रा, सूबेदार सोनम पाराशर सहित ग्वालियर जिले के थानों से आए विवेचना अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला के समापन अवसर पर *वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह (भा.पु.से.)* ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि एनडीपीएस एक्ट के मामलों में छोटी-सी कानूनी त्रुटि भी पूरे प्रकरण को कमजोर कर देती है, इसलिए विवेचना में शत-प्रतिशत कानूनी अनुपालन आवश्यक है। नशे का अवैध कारोबार समाज और युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है, और पुलिस की भूमिका केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं बल्कि समाज को सुरक्षित भविष्य देने की जिम्मेदारी भी है। विवेचना अधिकारी तकनीकी, वैज्ञानिक एवं विधिक ज्ञान से स्वयं को निरंतर अपडेट रखें, ताकि अपराधी किसी भी कानूनी कमजोरी का लाभ न उठा सकें। ग्वालियर पुलिस नशे के विरुद्ध ज़ीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही है और इस दिशा में निरंतर सख्त, संगठित एवं प्रभावी कार्यवाही की जाए। उन्होने कहा कि आप सभी विवेचक पुलिस विभाग की रीढ की हड्डी है आपको अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को सपोर्ट करना है और सबको ई साक्ष्य एप्लिकेशन का उपयोग करने का कहा गया। कार्यशाल के अंत में एसएसपी ग्वालियर द्वारा प्रशिक्षण में आये सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये।

कार्यशाला में *वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, आरएफएसएल ग्वालियर डॉ. विनोद ढिंगरा* द्वारा उपस्थित पुलिस अधिकारियों को एनडीपीएस प्रकरणों में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका जैसे सैंपल कलेक्शन, सीलिंग, पैकेजिंग एवं चेन ऑफ कस्टडी का सही तरीके से पालन न होने पर प्रकरण कमजोर हो जाता है आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होने कहा कि आरएफएसएल रिपोर्ट की गुणवत्ता तभी मजबूत होती है जब विवेचना वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप की जाए एवं डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण को केस डायरी से समन्वयित करना अत्यंत आवश्यक है।

*रिटायर्ड डीएसपी श्री मुनीश राजौरिया* द्वारा पुलिस अधिकारियों को एनडीपीएस मामलों की विवेचना में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं पर अनुभव आधारित मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने कहा कि तलाशी, जप्ती, गिरफ्तारी एवं सूचना लेखन में प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ ही अधिकतर मामलों में दोषमुक्ति का कारण बनती हैं एवं धारा 50 एनडीपीएस एक्ट का विधिवत पालन विवेचना की रीढ़ है। विवेचक को हर स्तर पर दस्तावेजी साक्ष्य को मजबूत बनाना चाहिए ताकि प्रकरण न्यायालय में प्रभावी हो सके।

*एनडीपीएस कोर्ट से एजीपी श्री धर्मेन्द्र कुमार शर्मा* ने कहा कि विवेचना अधिकारियों को केस डायरी, जप्ती पंचनामा, गवाहों के कथन एवं एफएसएल रिपोर्ट में आपसी सामंजस्य होना अनिवार्य है। न्यायालय में सशक्त अभियोजन के लिए प्रारंभिक विवेचना ही मजबूत होनी चाहिए। छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक चूकें गंभीर अपराधियों को कानूनी लाभ पहुँचा देती हैं, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है।

keyboard_arrow_up
Skip to content